डॉ. करुणाशंकर उपाध्‍याय को स्वदेश स्मृति सम्मान 2021

सिंहभूमि 

सिंहभूमि जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन की ओर से जमशेदपुर स्थित तुलसी भवन में हाल ही में आयोजित एक समारोह में प्रख्यात आलोचक और मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. करुणाशंकर उपाध्‍याय को स्वदेश स्मृति सम्मान 2021 देकर सम्‍मानित किया गया। डाॅ. उपाध्‍याय को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर के निदेशक डाॅ. करुणेशकुमार शुक्ल, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बालमुकुंद पैनाली और सिद्धिनाथ सिंह, सदस्य, अखिल भारतीय ग्राम विकास द्वारा मानपत्र, अंगवस्त्र, श्रीफल और नगद राशि देकर सम्मानित किया।

समारोह का आरंभ  उपस्थित अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। प्रसन्न वदन मेहता ने स्वागत भाषण दिया और वंदे शंकर सिंह ने विषय की प्रस्तावना करते हुए मैक्समूलर और मैकाले के षड्यंत्र की ओर ध्यान आकृष्ट किया। यमुना तिवारी व्यथित ने डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय के सम्मान में स्वरचित कविता पढ़ी और दिव्येंदु त्रिपाठी ने सम्मान पत्र का वाचन किया। डाॅ. करुणाशंकर उपाध्‍याय ने अपने वक्तव्य में स्वदेश प्रभाकर द्वारा स्वदेशी आंदोलन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हमारे प्रधानमंत्री जिस आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना की बात करते हैं वह हिंदी और भारतीय भाषाओं के द्वारा ही संभव है। विकास का संबंध स्वभाषा से है। विश्व के सभी देशों ने अपनी भाषा में विकास किया है। यहां तक कि इजराइल जैसे छोटे से राष्ट्र ने हिब्रू में उच्चस्तरीय शोधकार्य करके एक दर्जन से अधिक नोबेल पुरस्कार जीते हैं। हमें इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को उसकी मूल भावना के साथ लागू करना होगा। हम अपनी भाषा में ही नवाचार  और विश्व स्तरीय मौलिक अनुसंधान कर सकते हैं।

  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एन.आई.टी. के निदेशक डाॅ. करुणेशकुमार शुक्ल ने कहा कि हम भारतीयों को तकनीकी दक्षता अपनी भाषा में ही मिल सकती है। हमने एन.आई.टी. में हिंदी माध्यम में पाठ्यक्रम आरंभ किया है और मुझे विश्वास है कि वह दिन दूर नहीं है जब हम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी महाशक्ति बनेंगे। विशिष्ट अतिथि सिद्धनाथ सिंह ने कहा कि डॉ. उपाध्याय का सम्मान भारत बोध का सम्मान है। अध्यक्ष डाॅ. बालमुकुंद पैनाली ने कहा कि डाॅ. उपाध्याय को स्वदेश स्मृति सम्मान देकर संस्था ने स्वदेश प्रभाकर की स्वावलंबी सोच का सम्मान किया है। 

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