एसटी के 376 कर्मचारी निलंबित

महामंडल का सरकार में विलय को लेकर आंदोलन जारी

ST protest

मुंबई 

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे  महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन महामंडल (एसटी) के कर्मचारियों के खिलाफ सरकार ने सख्त रवैया अपनाया है। मिली जानकारी के अनुसार राज्यभर के 376 कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। ऐन त्यौहार के वक्त एसटी कर्मचारियों की हड़ताल से आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर राज्य के ग्रामीण क्षेत्र, जहां गंतव्य तक पहुंचने का एकमात्र सहारा एसटी बसें ही हैं। एसटी कर्मचारी महामंडल का विलय राज्य सरकार के साथ करने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। हड़ताल के 13वें दिन अधिकांश डिपो से बसों का संचालन नहीं हो पाया। एसटी कर्मचारियों की हड़ताल के मद्देनजर, महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार शाम से निजी बसों, स्कूल बसों, माल वाहनों और अनुबंध कैरिज बसों को यात्रियों को ले जाने की अनुमति दी है। एसटी के एक अधिकारी ने कहा कि केवल तीन डिपो - कोल्हापुर क्षेत्र में गारगोटी और कागल तथा नासिक क्षेत्र में इगतपुरी डिपो सोमवार को संचालित थे। कागल डिपो आंशिक रूप से संचालित था। कर्मचारी निगम का विलय राज्य सरकार में करने की अपनी मांग को लेकर 28 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे हैं। उन्होंने दिवाली त्योहार समाप्त होने के बाद रविवार से अपना आंदोलन तेज कर दिया है। कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सेवाएं प्रभावित हुईं और राज्य भर में लाखों यात्रियों को असुविधा हुई। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें राज्य सरकार के कर्मचारियों के रूप में मान्यता दी जाए। एसटी देश के सबसे बड़े राज्य परिवहन निगमों में से एक है, जिसमें 16,000 से अधिक बसें तथा बस चालक और कंडक्टर सहित लगभग 93,000 कर्मचारी हैं। पिछले साल कोरोना वायरस के प्रकोप से पहले महामंडल रोजाना 65 लाख से अधिक यात्रियों को परिवहन सुविधा मुहैया कराता था। हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा पूर्ण सहयोग देने और राज्य सरकार में महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम के विलय की मांग पर विचार करने के लिए एक समिति गठित करने के बावजूद अपनी हड़ताल वापस नहीं लेने पर अड़े कर्मचारियों को फटकार लगाई।


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