अब जम्मू-कश्मीर से कांग्रेस को झटका

पूर्व मंत्रियों, विधायकों ने सोनिया को भेजा सामूहिक इस्तीफा

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श्रीनगर

कई राज्यों में उठापटक का सामना कर रही कांग्रेस को अब जम्मू कश्मीर में बड़ा झटका है। प्रदेश में कांग्रेस के पूर्व 4 मंत्रियों और तीन मौजूदा विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को सामूहिक इस्तीफा भेजा है। इन नेताओं ने यह आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया है कि पार्टी की राज्य में स्थिति खराब है और उस पर बात करने के लिए लीडरशिप की ओर से समय नहीं दिया जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि जिन विधायकों और पूर्व मंत्रियों ने पार्टी से इस्तीफा दिया है, वे जी-23 में शामिल नेता गुलाम नबी आजाद के करीबी हैं। गुलाम नबी आजाद कई बार कांग्रेस में अध्यक्ष के चुनाव और अन्य सुधार के लिए आवाज उठाते रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इन नेताओं ने इस्तीफे का लेटर सोनिया गांधी के अलावा राहुल गांधी और जम्मू कश्मीर प्रभारी रजनी पाटिल को भी भेजा है।

 इन नेताओं ने लीडरशिप पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। इस्तीफा देने वाले नेताओं ने जम्मू कश्मीर के प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर पर भी निशाना साधा है। गुलाम अहमद मीर पर सीधा निशाना साधते हुए नेताओं ने कहा कि उनकी वजह से ही जम्मू-कश्मीर में आज पार्टी की हालत खराब है। बागी नेताओं ने कहा मीर के कमजोर नेतृत्व के चलते अब तक जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के 200 नेता पार्टी से पलायन कर चुके हैं।

हालांकि गुलाम नबी आजाद के ही करीबी नेता और पूर्व डिप्टी सीएम ताराचंद ने पूरे घटनाक्रम से दूरी बना ली है। इस्तीफा देने वाले नेताओं का कहना है कि उनकी ओर से कई बार राज्य में पैदा हुई समस्याओं पर बात करने के लिए शीर्ष नेतृत्व को संदेश दिया गया, लेकिन कोई जवाब ही नहीं मिला। नेताओं ने कहा कि उनकी ओर से करीब एक साल से लीडरशिप से मुलाकात के लिए वक्त की मांग की जा रही थी, लेकिन टाइम ही नहीं दिया गया। यही नहीं नेताओं ने कहा कि अगस्त में राहुल गांधी जब आए थे, तब भी उनसे मिलने का वक्त मांगा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

गुलाम अहमद मीर पर गुस्सा निकालते हुए नेताओं ने कहा कि उनकी लीडरशिप में केंद्र शासित प्रदेश में स्थिति खराब हो गई है। नेताओं ने कहा कि कुछ लोगों ने जम्मू-कश्मीर में पार्टी को हाईजैक कर लिया है। नेताओं ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में किसी भी वक्त विधानसभा के चुनाव हो सकते हैं और पार्टी हाईकमान यहां की समस्याओं पर ध्यान देने के लिए तैयार ही नहीं है। सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान का कहना है कि किसी भी समस्या के लिए पार्टी फोरम पर ही बात की जाएगी, लेकिन मीडिया में प्रचार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।


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