नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने पर गरमाई सियासत

पटना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सभी तीन नए कृषि कानून वापस लेने के फैसले पर बिहार के राजनीतिक दलों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है। सरकार के सहयोगी दल इसे किसानों के हित में लिया गया फैसला बता रहे हैं तो विपक्षी दल इस फैसले में देरी के लिए सरकार की आलोचना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्टता के साथ अपनी बातें रखी हैं। अब इस पर बोलने का कोई औचित्य नहीं बनता। जिनको फैसला लेने का अधिकार था उन्होंने लिया।

वहीं आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा कि देश का सबसे लंबा सत्याग्रह था जिसे देश के किसानों ने किया था। उन्होंने कहा कि यह बिना खून खराबा के अपना बलिदान देकर किसानों ने आंदोलन किया था, लेकिन सरकार ने उनके आंदोलन को बदनाम करने के लिए बहुत कुछ किया था। उत्तर प्रदेश पंजाब समेत कई राज्यों में चुनाव है उस को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सरकार ने लिया है। यह किसानों की भलाई के लिए नहीं, अपनी भलाई के लिए लिया गया फैसला है। भाजपा की ओर से प्रदेश के कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि एक भी किसान पर यह कानून जबर्दस्‍ती लागू किया जाए। इसलिए फिलहाल सरकार ने इसे वापस लेने का फैसला किया है। तीनों कानून किसानों के हित में ही थे। वहीं राजद के प्रवक्‍ता मृत्‍युंजय तिवारी ने फैसले का स्‍वागत किया। जदयू के डाॅ. अजय आलोक ने इस पर अफसोस जताया है।

प्रधानमंत्री ने अपने सही फैसले को वापस लिया

जदयू के डाॅ. अजय आलोक ने कहा कि छोटे किसानों की बेबसी खत्‍म करने का मकसद पूरा नहीं हो सका। उन्‍हें फिर से बिचौलियों पर निर्भर रहना होगा। उन्‍होंने कहा कि ये संवेदना से परिपूर्ण एक प्रधानमंत्री का फैसला है, जो अत्‍यंत छोटे तबके को भी नजरअंदाज करने से इनका करता है और अपने एक सही निर्णय को वापस लेता है। उन्‍होंने कहा कि इस देश में कुछ लोगों को सुधारों से परहेज है।

लालू की बेटी रोहिणी और पप्‍पू यादव ने सरकार को घेरा

राजद सुप्रीमो लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने कहा है कि अन्‍नदाता की जीत हुई है और पूंजीपतियों की हितैषी सरकार हार गई है। जन अधिकार पार्टी के अध्‍यक्ष पप्‍पू यादव ने कहा कि परजीवी सरकार आंदोलनजीवी से हार गई। काले कृषि कानूनों की वापसी जनसंघर्ष की जीत है। किसानों को दंगाई, आतंकवादी और देशद्रोही कह कर अपमानित करने वालों को अब माफी मांगनी चाहिए। राजद के सांसद मनोज झा ने इस मौके पर सरकार पर तंज कसा है। उन्‍होंने कहा कि हठधर्मिता और अहंकार को जन आंदोलन ने रास्‍ते पर ला दिया। सरकार को लोकतांत्रिक संवाद के रास्‍ते खुले रखने चाहिए। 


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