पीएम की किस्सागोई पर चुप रहे आडवाणी

जन्मदिन पर सिर्फ बोले धन्यवाद


नई दिल्ली 

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी 94 साल के हो गए। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सोमवार सुबह आडवाणी के घर पहुंचे और उनकी पसंद का चॉकलेट केक कटवाकर जन्मदिन की बधाई दी। पीएम मोदी उनके साथ करीब आधे घंटे तक रहे। इस दौरान उन्होंने पुराने दिनों के दो-तीन किस्से सुनाए। पीएम की किस्सागोई के दौरान आडवाणी चुप रहे। अंत में उन्होंने सिर्फ एक शब्द बोला- धन्यवाद। हालांकि यह कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ सालों से आडवाणी बेहद कम बोल रहे हैं। ज्यादातर मौकों पर वे चुप ही रहते हैं। इससे पहले रविवार को भाजपा की नेशनल एग्जिक्यूटिव मीटिंग में वे वर्चुअली शामिल हुए। उनके एक करीबी स्टाफ के मुताबिक दोपहर 2:00 से 3:00 बजे तक वे मीटिंग में रहे, लेकिन ऑन द रिकॉर्ड या ऑफ द रिकॉर्ड उन्होंने एक शब्द भी नहीं बोला। इसी साल अक्टूबर में भाजपा के एक नेता ने फैब इंडिया द्वारा एक उर्दू टैगलाइन इस्तेमाल करने के खिलाफ बयान दिया था। आडवाणी के एक करीबी ने बताया कि हमने इस मामले को लेकर उनकी राय जाननी चाही। करीब सवा घंटे तक इस मामले को उनके सामने बयां किया। आडवाणी जी चुप रहे। जब हमें लगा अब वे नहीं बोलेंगे, तो धीमी आवाज में एक लाइन सुनाई पड़ी। आडवाणी ने बस इतना कहा, 'पार्टी ही नहीं बल्कि पूरे समाज में ही सहनशीलता नहीं बची है।' आडवाणी 16वीं लोकसभा, यानी 2014-2019 के कामकाजी 321 दिनों में 296 दिन संसद में मौजूद रहे। इस दौरान वे ज्यादातर चुप ही रहे। महज पांच बार बोले। वह भी न के बराबर। इनमें से दो मौके थे स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के चुनाव के। इस दौरान आडवाणी ने भाषण तो दिए, लेकिन 'मैं इस प्रस्ताव का समर्थन करता हूं' कहकर चुप हो गए। 


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