भारत ने चीन, जर्मनी को छोड़ा पीछे


नई दिल्ली

जन धन योजना, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और गांव-गांव खुले बीसी के कारण भारत ने चीन, जर्मनी और साउथ अफ्रीका को पीछे छोड़ दिया है। भारत अब प्रति एक लाख वयस्कों पर बैंक शाखाओं की उपलब्धता के मामले में चीन से काफी आगे निकल गया है। भारत में अब प्रति एक लाख वयस्कों पर बैंक शाखाओं की संख्या बढ़कर 14.7 हो गई, जो 2015 में 13.6 थी। एसबीआई की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

क्या है बीसी

एसबीआई के समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष द्वारा लिखी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय समावेशन नीतियों का आर्थिक विकास, गरीबी और आय असमानता को कम करने के साथ-साथ वित्तीय स्थिरता पर कई गुना प्रभाव पड़ता है। बता दें कि बैंक मित्र यानी बैंकिंग कॉरस्पॉन्डेंट वे लोग होते हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अंतर्गत बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध करवाने का जिम्मा दिया गया है। खासतौर पर ये लोग उन जगहों पर कार्य करते हैं, जिन जगहों पर न तो किसी बैंक की शाखा है और न ही कोई एटीएम। ऐसे में येे लोग आम जरूरतमंदों तक पहुंचकर प्रधानमंत्री योजना से संबंधित जानकारी से लेकर आपको धन राशि पहुंचाने तक का काम करते हैं।

भारत ने 2014 से पीएमजेडीवाई खातों की शुरुआत की। यह एक मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे और बैंक शाखाओं के सावधानीपूर्वक पुनर्गणना द्वारा सक्षम है और इस तरह वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने के लिए बीसी मॉडल का विवेकपूर्ण उपयोग कर रहा है। इस तरह के वित्तीय समावेशन को डिजिटल भुगतान के उपयोग से भी सक्षम किया गया है, क्योंकि 2015 और 2020 के बीच प्रति 1,000 वयस्कों पर मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग लेनदेन 2019 में बढ़कर 13,615 हो गए हैं, जो 2015 में 183 थे।

जन धन खातों से घटे अपराध

रिपोर्ट में कहा गया है कि रिसर्च से यह भी पता चलता है कि जिन राज्यों में प्रधान मंत्री जन-धन योजना खाते अधिक हैं, वहां अपराध में स्पष्ट गिरावट देखी गई है। हमने यह भी देखा कि जिन राज्यों में अधिक पीएमजेडीवाई खाते खोले गए हैं, वहां शराब और तंबाकू उत्पादों जैसे नशीले पदार्थों की खपत में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण और आर्थिक रूप से सार्थक गिरावट आई है। 2017 की नई शाखा प्राधिकरण नीति, जो बीसी को मान्यता देती है, प्रति दिन न्यूनतम चार घंटे और सप्ताह में कम से कम पांच दिन बैंकिंग सेवाएं प्रदान करते हैं। 


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