परमबीर का नया ​ठिकाना बेल्जियम

सं​जय ​निरुपम का सनसनीखेज खुलासा, नेपाल के रास्ते भागे


मुंबई 

मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि मुंबई पुलिस के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह चंडीगढ़ से नेपाल होते हुए यूरोप के देश बेल्जियम भाग खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह के पास लंदन में एक बड़ी कोठी है, और उसमें उनका पूरा परिवार रह रहा है। निरुपम ने पहले ट्वीट और बाद में एक निजी वीडियो जारी करते हुए इस बात का खुलासा किया।

निरुपम ने कहा कि परमबीर सिंह एक प्रतिष्ठित पद पर थे। ऐसा व्यक्ति एनआईए, सीबीआई और पुलिस की पकड़ से बाहर कैसे हो गया? उन्होंने कहा कि हमारे पास जो जानकारी है, उसके अनुसार परमबीर सिंह बेल्जियम में है। 

उन्होंने सवाल उठाया कि वे बेल्जियम कैसे चले गए? उन्हें जाने कैसे दिया गया, या उनके भागने का इंतजाम किया गया। यदि ऐसा हुआ है तो केंद्रीय जांच एजेंसियां भी सवालों के दायरे में आएंगी। हमारी केंद्र सरकार कहती है कि सीमा चाक-चौबंद है, लेकिन ठीक नाक के नीचे और राजधानी दिल्ली से कुछ दूर स्थित चंडीगढ़ से एक अपराधी निकल जाता है। वे चंडीगढ़ से नेपाल होते हुए बेल्जियम निकल गए। निरुपम ने कहा कि उनके दूसरे देश की नागरिकता लेने की भी चर्चा है। ये सारी बातें अधिकृत सरकारी एजेंसियां ही बता सकती हैं कि वह कहां है और क्या कर रहे हैं? हमारे पास जानकारी आ रही है कि उनकी लंदन में मेफेयर इलाके में एक बड़ी कोठी है और वहां उनका पूरा परिवार रहता है। इस मामले में इंटरपोल से सहयोग लेना होगा। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से विजय माल्या, मेहुल चोकसी, नीरव मोदी और एक जमाने में ललित मोदी भागा था, उसमें अब परमबीर सिंह का नाम भी शामिल हो गया है। उनके खिलाफ पांच एफआईआर और एक गैर जमानती वारंट है।   

ठाणे और मुंबई में परमबीर के खिलाफ हैं अरेस्ट वारंट

परमबीर सिंह के खिलाफ मुंबई सहित ठाणे में वसूली के कई मामले दर्ज हैं. इस वजह से उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी किया गया है, लेकिन उनकी कहीं कोई खोज-खबर नहीं है। इसलिए ठाणे कोर्ट के बाद मुंबई के किला कोर्ट ने भी उनके खिलाफ गैरजमानती अरेस्ट वारंट जारी किया है।

गिरफ्तारी से छूट देने से राज्य सरकार ने किया इंकार  

परमबीर सिंह पर गंभीर आरोप हैं। उन आरोपों की जांच के दौरान उन्हें बार-बार समन भेजा गया। लेकिन वे पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुए। वे कहां हैं, इसका पता राज्य सरकार को नहीं है। इसलिए राज्य सरकार ने 20 अक्टूबर को हाई कोर्ट को यह स्पष्ट किया है कि वह यह वादा नहीं कर सकती कि परमबीर पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी।


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