पांच करोड़ की बिजली चोरी का पर्दाफाश

मुंबई 

एमएसडीईसीएल की टीम को वसई तालुका के माजिवली में ‘डायमंड आइस फैक्ट्री’ से बिजली चोरी का पर्दाफाश करने में सफलता मिली है। फैक्ट्री द्वारा पिछले 59 महीनों में रिमोट कंट्रोल सर्किट लगाकर 4 करोड़ 93 लाख 98 हजार 460 रुपए की 27 लाख 48 हजार 364 यूनिट बिजली चोरी का खुलासा हुआ है। इंजीनियर अधीक्षक राजेश सिंह चव्हाण की शिकायत पर विरार थाने में फैक्ट्री के चार निदेशकों सहित एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ बिजली चोरी का मामला दर्ज किया गया है। मामले में मंसूरभाई वलजीभाई कानन, शहाबुद्दीन अब्बास समानानी, बदरुद्दीन नानजी ओलचिया, निजार नानजी ओलचिया और एक अज्ञात व्यक्ति को नामजद किया गया। डायमंड आइस फैक्ट्री माजीवली में परोला से भिवंडी रोड पर स्थित है। धनंजय औढ़ेकर मुख्य अभियंता कल्याण परिमंडल के मार्गदर्शन में  टीम ने 30 अक्टूबर को दोपहर में फैक्ट्री की बिजली आपूर्ति का निरीक्षण किया। 31 अक्टूबर की सुबह तक गहन निरीक्षण में पाया गया कि मीटर की ओर जाने वाली तीन सीटी में काले, पीले और नीले रंग के चिपकने वाले प्रत्येक चरण की वायरिंग के चारों ओर लिपटे हुए थे और वे अंदर एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट से जुड़े थे। तकनीकी विश्लेषण में खुलासा हुआ कि रिमोट कंट्रोल की मदद से इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को नियंत्रित करने से, कारखाने की वास्तविक बिजली की खपत मीटर में कम दर्ज की जाती थी।

बर्फ बनाने वाली फैक्ट्री और फैक्ट्री परिसर के पांच लिविंग रूम में भी बिजली की सप्लाई की जा रही थी। बिजली चोरी नवंबर 2016 से अक्टूबर 2021 तक शुरू थी। आरोपी के खिलाफ विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 138, 135 और 150 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मौक़े पर अधीक्षक अभियंता चव्हाण (कार्यकारी अभियंता जाधव), उप कार्यकारी अभियंता पराग भिसे, रमेश टाक, सहायक अभियंता विनायक लांघी, योगेश पाटिल, वैभव मोरे और हर्षल राणे की टीम उपस्थित थी। प्रशांत दानी (कार्यकारी अभियंता, विरार मंडल) और राजीव वामन, सहायक कानूनी अधिकारी ने इस ऑपरेशन में मदद दी।


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