अवैध निर्माणों की पहचान करेगी मनपा

ठेकेदार की हुई नियुक्ति । 11.20 करोड़ रुपए होंगे खर्च


मुंबई 

मुंबई महानगर पालिका (मनपा) 1990 के बाद से अब तक मुंबई में हुए अवैध निर्माण की पहचान करने जा रही है। इसके लिए मनपा ने प्राइवेट कंपनी की नियुक्ति की है, जिसको मनपा 11.20 करोड़ रुपए देगी। कंपनी विशेष सॉफ्टवेयर, जीजीए और अत्याधुनिक सिस्टम के माध्यम से अवैध निर्माणों की तलाश करेगी। मनपा स्थायी समिति में इस आशय का प्रस्ताव लाई है। 

मुंबई में आए दिन अवैध निर्माण होते रहते हैं। कुछ इलाकों में झोपड़े की उंचाई चार से छह मंजिला तक बढ़ा दी गई है। इतने वर्षों बाद अवैध निर्माण के पीछे मनपा का मकसद क्या है? इस पर चर्चा होने लगी है। आशंका जताई जा रही है कि मनपा ऐसे अवैध निर्माण का पता लगाने और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करेगी। यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें नियमित करने अथवा विकास में बाधा डालने पर उन्हें हटाने का प्रयास करेगी। 

तिजोरी भरने का प्रयास

मनपा को केंद्र से मिल रहे जीएसटी की राशि 2022 के बाद मिलनी बंद हो जाएगी। जीएसटी ही राजस्व का प्रमुख श्रोत है। अवैध निर्माण को रेग्युलाइज कर मनपा अपनी तिजोरी भरने के लिए नए श्रोत के रूप में देख रही है। अवैध निर्माण को रेग्युलाइज करने पर मनपा की तिजोरी में करोडों रुपए जमा हो सकते हैं। बीएमसी के इस प्रस्ताव का विरोध होने की संभावना है। 

कोर्ट के आदेश पर होगी जांच 

मनपा अधिकारी ने कहा कि मुंबई हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के समय मुंबई में किए गए अवैध निर्माण की जांच करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर अवैध निर्माणों की तलाश होगी। 

ऐसे होगी जांच 

मनपा एक निजी कंपनी के माध्यम से वर्ष 1990 के बाद मुंबई और उपनगर में हुए अवैध निर्माण की तलाश करने वाली है। इसके लिए सॉफ्टवेयर, जीजीएस सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। इसमें यह पता लगाया जाएगा जहां अवैध निर्माण हुए हैं वहां पहले क्या स्थिति थी और अब क्या है? इसके लिए मनपा ने निविदा जारी कर मेसर्स एमनेक्स इंफो टेक्नालॉजी को चार वर्ष दो महीने के लिए ठेका दिया है। जिसके लिए मनपा 11.20 करोड़ रुपए का भुगतान करेगी। 


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