विकासशील देशों को मदद की जरूरत


नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिन का रोम दौरा खत्म करने के बाद कॉप 26 समिट में शामिल होने ग्लासगाे पहुंचे। यहां उन्होंने दुनिया के सामने जलवायु परिवर्तन को लेकर भारत का एजेंडा सामने रखा। कॉप 26 में एक्शन एंड सॉलिडेरिटी: द क्रिटिकल डिकेड सेगमेंट में भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में जल से नल परियोजना में लोगों को लाभ मिला। भारत में स्वच्छता अभियान से लोगों के जीवन में सुधार आया। ग्लोबल वॉर्मिंग पर छोटे देशों को मदद की जरूरत है। बारिश, बाढ़ और तूफान से फसलें बर्बाद हो रही हैं। पिछड़े देशों को वैश्विक मदद की जरूरत है। इसके लिए विकसित देशों को आगे आना होगा। दुनिया को अब एडाॅप्टेशन पर ध्यान देना होगा। जरूरत है कि ग्लोबल वॉर्मिंग के मुद्दे पर सभी देश एक साथ आएं और इसे जन भागीदारी अभियान बनाएं। 

हम अपनी कब्र खोद रहे हैं: समिट में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि पेरिस जलवायु समझौते के बाद से पिछले छह सालों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी पड़ी है। जीवाश्म ईंधन का तेजी से उपयोग करके हम मानवता को खात्म की कगार पर धकेल रहे हैं। हमें एक कड़ा निर्णय लेना होगा। या तो हम इसे रोक दें या जलवायु परिवर्तन से हम रुक जाएंगे। गुतारेस ने आगे कहा कि जैव विविधता के साथ क्रूर बर्ताव बहुत हुआ, कार्बन के साथ खुद को मारना बहुत हुआ, प्रकृति के साथ शौचालय जैसा बर्ताव बहुत हुआ। हम अपनी कब्र खुद खोद रहे हैं। हमारी आंखों के सामने हमारा ग्रह बदल रहा है।

दुनिया के सामने उदाहरण पेश करेगा अमेरिका: बाइडेन

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी समिट में अपनी बात रखी। बाइडेन ने कहा कि हममे निवेश करने और एक स्वच्छ ऊर्जा वाले भविष्य का निर्माण करने की क्षमता है। इस प्रक्रिया में दुनिया भर में लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे हमारे बच्चों के लिए स्वच्छ हवा, हमारे ग्रह के लिए स्वस्थ वन और पारिस्थितिकी तंत्र तैयार होगा। हम दिखाएंगे कि अमेरिका दुनिया के सामने उदाहरण पेश करेगा और शक्ति से नेतृत्व करेगा। हमारा प्रशासन जलवायु प्रतिबद्धताओं को शब्दों में नहीं, बल्कि कार्यों के जरिए पूरा करने के लिए लगातार काम कर रहा है।


Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget