चुनावी वादे में खरी नहीं उतरी शिवसेना

गड्ढा मुक्त नहीं हुई मुंबई की सड़कें        


मुंबई

मनपा चुनाव में बड़े-बड़े वादे करने वाले प्रमुख राजनीतिक दलों ने मुंबईकरों के साथ धोखा किया है। सबसे ज्यादा सवाल सत्ताधारी के वादे पर उठाए गए हैं। पिछले बीएमसी चुनाव में शिवसेना ने मुंबई को गड्ढा मुक्त, भाजपा ने 24 घंटे पानी, कांग्रेस, एनसीपी ने फेरीवालों के लिए नीति बनाने का वादा किया था। लेकिन सत्ताधारी दलों के नगरसेवकों ने इन मुद्दों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। चुनाव के पांच साल बाद भी यह समस्याएं लोगों के सामने मुंह बाए खड़ी हैं, जबकि फरवरी 2022 में बीएमसी चुनाव होना है। 

मनपा चुनाव के दौरान अपने-अपने घोषणा पत्र में राजनीतिक दलों ने मुंबईकरों से क्या वादा किया था और उसे कितना पूरा किया, प्रजा फाउंडेशन ने उसका लेखा-जोखा सामने रखा। प्रजा फाउंडेशन का कहना है कि राजनीतिक दलों के चुनावी वादे सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए, जबकि मुंबईकर अब भी उसी समस्या का सामना कर रहे हैं। फाउंडेशन ने गुरूवार को 'मुंबई के पक्षानुसार घोषणापत्र (2017- 22) का विश्लेषण और लक्ष्य 2022-2027' के लिए रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार शिवसेना ने नई तकनीक का इस्तेमाल कर मुंबई को गड्ढा मुक्त करने का वादा किया था , लेकिन वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2020-21 के बीच मुंबई में सड़कों से संबंधित 17,908 शिकायतें बीएमसी को मिलीं। भाजपा ने 24 घंटे पानी का वादा किया था लेकिन वह सत्ता में नहीं है, जबकि मुंबई के 290 क्षेत्रों में से 204 क्षेत्रों में सिर्फ 4 घंटे पानी की आपूर्ति की गई। एनसीपी व कांग्रेस ने अपने चुनाव वादे में फेरीवालों और विशेष क्षेत्रों के लिए नीति बनाने का वादा किया था। जबकि वर्ष 2017-18 से 2020-21 के दौरान फेरीवालों से संबंधित 34,129 शिकायतें दर्ज की गई। 

सीवरेज व जल निकासी की सबसे ज्यादा शिकायतें 

पांच साल के दौरान जनता की शिकायतों का निवारण नहीं किया गया है। मुंबई में सबसे ज्यादा 75915 शिकायतें सीवरेज व जल निकासी से संबंधित रहीं। नगरसेवकों ने जल निकासी व सीवरेज से संबंधित सिर्फ 136 प्रश्न पूछे। कचरे से संबंधित 54,029 शिकायतें बीएमसी को मिलीं, जिसमें 40 प्रतिशत कचरा न उठाने से संबंधित थीं। नगरसेवकों ने कचरे के मुद्दे पर सिर्फ 287 सवाल बीएमसी प्रशासन से पूछा है। सड़क पर बने गड्ढे की समस्या दूर करने के लिए नगरसेवकों ने सिर्फ 2 प्रतिशत सवाल पूछा, इसी तरह जलापूर्ति के लिए 7 प्रतिशत पश्न पूछी गए। चुनावी वादों के बावजूद नगरसेवकों ने फेरीवालों व स्ट्रीट वेंडर से जुड़े सिर्फ 4 प्रतिशत प्रश्न उठाया।


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