अमरावती में भड़की हिंसा, लगा कर्फ्यू

बंद के दौरान भीड़ ने किया पथराव       इंटरनेट सेवाएं बंद     20 गिरफ्‍तार


मुंबई

अमरावती शहर में शनिवार को हिंसा की घटना के बाद शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। एक भगवा संगठन द्वारा आयोजित बंद के दौरान भीड़ ने विभिन्न स्थानों पर पथराव किया और दुकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करना पड़ा। इस हिंसा के बाद इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। यह घटना त्रिपुरा की सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में अमरावती शहर में शुक्रवार को मुस्लिम संगठनों द्वारा आयोजित रैलियों के दौरान हुई पथराव की घटनाओं के खिलाफ एक भगवा संगठन के बंद के दौरान हुई। इसके पहले शुक्रवार को राज्य के मालेगांव और नांदेड में बंद के दौरान हिंसा हुई थी। 

अमरावती पुलिस ने चिकित्‍सा कारण को छोड़कर सभी के घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी है। अमरावती में कर्फ्यू लगने का असर एम्‍स आईएनआई सीईअी 2021 की परीक्षा देने वाले छात्रों पर पड़ सकता है। इस परीक्षा का सेंटर अमरावती है। यह परीक्षा रविवार 14 नवंबर को आयोजित की गई है।

अमरावती के राजकमल चौक इलाके में सैकड़ों लोग नारे लगाते हुए सड़कों पर निकल आए। इनमें से कई के हाथों में भगवा झंडे थे। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि भीड़ के कुछ सदस्यों ने राजकमल चौक इलाके तथा कुछ अन्य जगहों पर दुकानों पर पथराव किया और उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया।  उन्होंने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। शुक्रवार को अधिकारियों ने बताया था कि आठ हजार से अधिक लोग अमरावती जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर एक ज्ञापन सौंपने के लिए जमा हुए थे, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ अत्याचार को रोकने की मांग की गई थी। 

अमरावती की घटना सुनियोजित साजिश: फड़नवीस  

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि त्रिपुरा में जो घटना घटी नहीं, उस पर महाराष्‍ट्र में प्रतिक्रिया होना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर महाविकास आघाड़ी सरकार के मंत्री मंच से भड़काऊ, बांटने वाले बयान देना जारी रखेंगे तो दंगे की संपूर्ण जवाबदारी सरकार की होगी। उन्होंने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा सरकार और वहां की पुलिस ने इस बारे में संपूर्ण जानकारी दी है। आरोप है कि मस्जिद जला दी गई, लेकिन मस्जिद को जलाने की कोई घटना नहीं हुई। उस मस्जिद के फोटो भी जारी किए गए। इसलिए केवल झूठी अफवाह फैलाई गई। जिसने यह झूठी अफवाह फैलाई उस पर भी कार्रवाई की गई, लेकिन केवल अफवाहों पर मोर्चा निकाला गया। आगजनी की गई और हिंदुओं की दुकानों को जलाया गया। अमरावती की घटना चिंताजनक है। यह एक सुनियोजित साजिश लगती है। ऐसे में अगर राज्य सरकार के मंत्री ही यदि भावनाओं को भड़का रहे हैं तो यह बेहद गंभीर बात है। अगर ऐसा ही माहौल रहा तो दंगों की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। मैं सभी से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं।


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