कोवैक्सीन को मंजूरी

काफी हीला हवाली के बाद अंततः विश्व स्वास्थ्य संगठन से हमारी कोवैक्सीन को हरी झंडी मिल गई, यह देश के लिए गर्व की बात है. जिस तरह रिकॉर्ड समय में देश में दो वैक्सीन तैयार हुईं और जिस तरह उसे दुनिया के तमाम देशों द्वारा सराहा, अपनाया गया और जिस तरह से उसके प्रदर्शन की सारी जानकारियां विश्व स्वास्थ्य संगठन के सामने रखी गई, उसका प्रतिफल है कि उसे हरी झंडी देने के लिए बाध्य होना पड़ा. अब तक के विलम्ब के लिए उस पर तमाम तरह की टिप्पणियां भी हुईं और उस पर चीन परस्ती तक के भी आरोप लगते रहे हैं. खैर जो कुछ भी हुआ आज इसे मंजूरी मिल गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का कारोबार इस तरह होना चाहिए जिस पर कोई उंगली ना उठा सके. कोरोना काल में उसकी कई बिंदू पर कई बार घेराबंदी हुई, जो ठीक नहीं है. ऐसे  संगठनों पर कोई आक्षेप ना लगे उस पर विशेष ध्यान देना चाहिए. अब विश्वास है कि कंपनी इसका उत्पादन और तेज करते हुए देश की आवश्यकताओं को पूरा करेगी और दूसरे देशों में भी जहां इसकी जरूरत है अपनी जबर्दस्त उपस्थिति दर्ज करायेगी. यह मोदी युग का कमाल है कि हमारे उद्यमियों और वैज्ञानिकों ने ना सिर्फ रिकॉर्ड समय में दो-दो वैक्सीन बनाई, बल्कि उसकी धमक दुनियाभर में पहुंचाई. देश में तो वैक्‍सीनेशन नया कीर्तिमान बना रहा है, दुनिया भी इससे लाभान्वित हो रही है.


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