नहीं रहे 'शिवशाहीर' बाबासाहेब पुरंदरे


मुंबई

अपनी ओजस्वी वाणी से छत्रपति शिवाजी महाराज के चरित्र को घर-घर तक पहुंचाने वाले ‘राजा शिव छत्रपति’ किताब के लेखक और महानाटक ‘जाणता राजा’ के लेखक-निर्देशक, इतिहासकार बाबा साहेब पुरंदरे का सोमवार सुबह पुणे के दीनानाथ मंगेशकर मेमोरियल अस्पताल में निधन हो गया। उनका पुणे में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। महाराष्ट्र में उनके निधन की खबर सुनकर शोक ही लहर फैल गई। उनके निधन पर प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उप मुख्यमंत्री अजित पवार, राकांपा प्रमुख शरद पवार, पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस सहित कई नेताओं ने शोक प्रकट किया है।

बलवंत मोरेश्वर उर्फ बाबा साहेब पुरंदरे 99 वर्ष के थे और सौवें साल में प्रवेश कर चुके थे। 17वीं शताब्दी के मराठा योद्धा राजा छत्रपति शिवाजी पर उन्होंने काफी काम किया है और उन्हें इसी काम के लिए 'शिवशाहीर' के नाम से जाना जाता है। उन्हें हाल ही में निमोनिया हो गया था, जिसका इलाज चल रहा था। इस साल जुलाई में ही उन्होंने अपने सौवें साल में प्रवेश किया था। 29 जुलाई, 1922 को पुणे के पास सासवड में जन्मे पुरंदरे कम उम्र से ही छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से मोहित हो गए थे और उन्होंने उन पर काफी शोध कर निबंध और कहानियां लिखी, जो बाद में एक पुस्तक रूप 'थिनग्या' (स्पार्क्स) में प्रकाशित हुईं।

पीएम-शाह ने दी पुरंदरे को श्रद्धांजलि

पीएम मोदी ने पुरंदरे के निधन पर ट्वीट कर कहा, मैं शब्दों से परे हूं। बाबा साहेब पुरंदरे के निधन से इतिहास और संस्कृति की दुनिया में एक बड़ा शून्य हो गया है। यह उनके लिए धन्यवाद है कि आने वाली पीढ़ियां छत्रपति शिवाजी महाराज से और जुड़ेंगी। उनके अन्य कार्यों को भी याद किया जाएगा। मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि देता हूं। वहीं गृहमंत्री शाह ने भी पुरंदरे के निधन पर शाेक प्रकट करते हुए उन्‍हें श्रद्धांजलि दी।

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उनके निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि शिवशाहीर बाबा साहेब पुरंदरे एक अलौकिक व्यक्तित्व थे। उनकी प्रत्येक सांस छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए थी। 

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि ऐसा अलौलिक शिव आराधना कोई नहीं होगा। शिवशाहीर शिव चरणों में लीन हो गए। 

पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि प्रख्यात शिवशाहीर बाबा साहेब पुरंदरे हमसे दूर चले गए। मन बहुत पीड़ा में है और उनकी यादें, उनके संग में बिताए पल आंखों के सामने आ रहे हैं। तकरीबन तीन पीढ़ियों ने उनसे शिवचरित्र पढ़ा और सुना। यह हमारी पीढ़ी का सौभाग्य है। 

राकांपा प्रदेश अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि बाबा साहेब पुरंदरे के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। 


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