खंडित भारत को अखंडित बनाना होगा : भागवत


नोएडा

देश का विभाजन न मिटने वाली वेदना, यह तभी मिटेगी जब विभाजन निरस्त होगा। मेरा जन्म विभाजन के बाद हुआ, इस बात को समझने में बचपन के कुछ साल और लगे। मैंने काफी अध्ययन के बाद समझा कि जिस मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए कई बलिदान हुए उसका विभाजन हुआ। भारत एक जमीन का टुकड़ा नहीं हमारी मातृभूमि है। संपूर्ण दुनिया को कुछ देने लायक हम तब होंगे जब विभाजन हटेगा। यह राजनीति नहीं हमारे अस्तित्व का विषय है। यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने कही।

उन्होंने लोगों से कहा कि खंडित भारत को अखंडित बनाना होगा यह हमारा राष्ट्रीय एवं धार्मिक कर्तव्य है। विभाजन इस्लामिक आक्रमण, अंग्रेजों के आक्रमण का नतीजा है। इसकी पृष्ठभूमि इन आक्रमणों से जुड़ी है। आक्रमणकारियों की मनोवृत्ति अलगाव एवं स्वयं को बेहतर साबित करने की रही। अंग्रेजों ने समझा कि बिना लोगों में अलगाव किए यहां राज नहीं कर सकते।

भारत के उत्थान में धर्म का हमेशा स्थान रहा है। 1947 की खंडित स्वतंत्रता के बाद भी अलगाव की मानसिकता से टकराव जारी है। कैसे देश टूटा उस इतिहास को पढ़ना होगा। अप्रिय हो लेकिन जो सत्य हो वही इतिहास पढ़ना जरूरी है। इतिहास को समझकर सीखकर आगे बढ़ना होगा लेकिन जब एक बार अलगाव हो गया तो अब दंगे क्यों होते हैं। हम ही सही बाकी गलत की मानसिकता विभाजनकारी। 

पाकिस्तान पर होना चाहिए मुकदमा

लेखक कृष्णानंद सागर ने कहा कि उनकी पुस्तक विभाजन के दौर में हुए षड्यंत्रों पर आधारित है। उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश शंभू नाथ श्रीवास्तव ने कहा कि इतिहास को बदलकर प्रस्तुत किया गया है। विभाजन के दौर में भारी नरसंहार हुआ। इसके लिए पाकिस्तान पर मुकदमा होना चाहिए।


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