दादी-नानी को अपने बच्चों से प्यारे होते हैं पोते-पोतियां


ऐसे निकाला गया निष्कर्ष

शोधकर्ताओं ने दादी-नानी को पोते-पोती के तस्वीर दिखाकर उनका मस्तिष्क स्कैन किया।

 पोते-पोती की तस्वीर देखकर दादी के मस्तिष्क के भावनात्मक सहानुभूति से जुड़े भाग सक्रिय हुए।

 वहीं अपनी संतानों की तस्वीरों के दीदार से संज्ञानात्मक सहानुभूति से जुड़े मस्तिष्क भाग सक्रिए हुए।

 पोते-पोती, दादी-नानी की देखभाल अधिक प्रभावी तरीके से कर सकते हैं।

 03 से बारह साल के पोते-पोतियों की तस्वीरें दिखाई गईं बुजुर्ग प्रतिभागी महिलाओं को।

तस्वीरें दिखाई गईं

शोधकर्ताओं ने 50 दादी-नानी के दिमाग को उस वक्त स्कैन किया। सभी को उनके तीन से 12 साल की उम्र के पोते-पोतियों की तस्वीरें दिखाई गईं। इस दौरान उन्हें अपनी संतानों की तस्वीरें भी दिखाई गईं। प्रतिभागियों ने अपने अनुभवों से जुड़ी प्रश्नावली के जवाब भी दिए। निष्कर्षों से पता चला कि संतानें माता-पिता को अधिक समझती हैं, लेकिन भावनात्मक लगाव पोते-पोती और दादी के बीच अधिक होता है।

बच्चों की देखभाल में प्रमुख सहयोगी

शोधकता रिलिंग का कहना है, हम अक्सर मानते हैं कि माताओं के बाद पिता ही बच्चों की सबसे अच्छी तरह से देखभाल करने वाले होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में, माताओं के लिए बच्चों की देखभाल के मामले में उनकी दादी प्राथमिक सहायक होती हैं। दादी-नानी अपने पोते-पोतियों के जीवित रहने की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद करती है।

क्सर दादी-नानी को अपने पोते-पोतियों से गहरा प्यार और लगाव होता है। एक हालिया अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने भी इस बात पर मुहर लगा दी है कि दादी-नानी का लगाव अपने बच्चों से ज्यादा पोते-पोतियों से होता है।

नए अध्ययन से पता चला है कि दादी अपनी संतान की तुलना में पोते-पोतियों से अधिक भावनात्मक रूप से जुड़ी हो सकती हैं। अध्ययन के दौरान अमेरिकी वैज्ञानिकों ने प्रतिभागी दादियों के दिमाग को उस वक्त स्कैन किया, जब वे अपने पोते-पोतियों की तस्वीरों का दीदार कर रही थीं। शोधकर्ताओं ने पाया कि अपने पोते-पोतियों की तस्वीरों को देखते हुए दादी के मस्तिष्क के भावनात्मक सहानुभूति से संबंधित क्षेत्र सक्रिय हो गए। भावनात्मक सहानुभूति तब होती है, जब हम किसी अन्य व्यक्ति के समान भावना महसूस करते हैं। जैसे कि सामने वाले को अगर दर्द हो तो उससे हम भी खुद को असहज और संकट में महसूस करें।

इसके विपरीत जब प्रतिभागियों ने पोते-पोतियों की बजाय बेटे और बेटियों की तस्वीरें देखीं तो उनके मस्तिष्क का संज्ञानात्मक सहानुभूति से जुड़े मस्तिष्क क्षेत्र सक्रिय हुए। संज्ञानात्मक सहानुभूति तब होती है, जब आप किसी दूसरे की भावनाओं को समझ सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप बिल्कुल वही महसूस कर रहे हैं, जो सामने वाला महसूस कर रहा हो।


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