अस्ताचलगामी सूर्य को आस्था का अर्ध्य

सरकारी गाइडलाइन के बीच हुई छठ पूजा


मुंबई

सूर्योपासना का महापर्व छठ पूजा बुधवार की शाम अस्ताचल गामी सूर्य को अर्ध्य देने के साथ मनाया गया। तीन दिन पहले 'नहाय खायके' साथ शुरू हुआ उत्तर भारत का यह पर्व महानगर में महापर्व बन गया है. षष्ठी तिथि को डूबते सूर्य को दूध और गंगाजल से अर्ध्य देने के बाद छठ व्रती आज गुरुवार को उगते सूर्य (उदयाचलगामी) को अर्ध्य देकर इस व्रत का पारणा (समापन) करेंगे। मुंबई और उसके आस-पास के शहरों में रहने वाली छठ व्रती कोरोना काल के चलते मनपा प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन के मद्देनजर सिर्फ कृत्रिम तालाबों में ही अर्ध्य दे सके. नदियों और समुद्री तटों पर आयोजन की अनुमति नहीं होने से कई लोगों ने घरों में ड्रमों में जल के बीच पूजा की. मुंबई के उपनगरों में नेताओं द्वारा मनपा के सहयोग से बनाए गए तथा अपने द्वारा तैयार कराए गए कृत्रिम तालाबों में सभी सुविधाओं के साथ पूजन सामग्री उपलब्ध कराई गई. कांदिवली पश्चिम के गणेश नगर में भाजपा नगरसेवक कमलेश यादव, कांदिवली पूर्व में राजपति यादव, पोइसर में अशोक सिन्हा, बोरीवली में डॉ. किशोर सिंह, नालासोपारा में डॉ. ओमप्रकाश दुबे द्वारा स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई। उत्तर मुंबई के भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी ने क्षेत्र में होने वाले आयोजनों का घूम-घूम कर जायजा लिया। कांदिवली के गणेश नगर में हजारों  में छठ व्रतियों की भीड़ उमड़ी। इसके अलावा मालाबार िहल में भी छठपूजा की गई। लोग अपनी सुविधानुसार अन्य स्थानों पर आयोजित छठ पूजा महोत्सव में शामिल होकर अर्ध्य दिया। 

मुंबई में 1993 में छठ पूजा की शुरुआत

कई दशकों से मुंबई में रहने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के छठ व्रतियों के लिए बिहारी समाजसेवी मोहन गंगा मिश्र ने अपने कुछ मित्रों के साथ छठ उत्सव महासंघ के बैनर तले 1993 में जुहु बीच पर छठ पूजा की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे इसमें लाखों छठ व्रतियों की भीड़ उमड़ने लगी। इसकी लोकप्रियता देखते हुए संजय निरुपम ने बिहारी फ्रंट का गठन कर 1998 में जुहु तट पर छठ पूजा की शुरुआत की।


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