कृषि कानून पर अड़े किसान

टिकैत बोले-एमएसपी पर बात करे सरकार


लखनऊ
 

संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत में राकेश टिकैत मोदी व योगी सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी भाषा में समझाने में एक साल लग गए। अब प्रधानमंत्री को ये समझ आया कि कृषि कानून किसान, मजदूर व दुकानदार विरोधी हैं। टिकैत ने कहा कि सरकार ने किसानों को बांटने का प्रयास किया। इको गार्डेन पार्क में आयोजित महापंचायत में कहा कि माफी मांगने से किसानों का भला होने वाला नहीं है, उनका भला एमएसपी कानून बनाने से होगा। उन्होंने कहा कि इस कानून को लेकर केंद्र सरकार झूठ बोल रही है कि कमेटी बना रहे हैं, जबकि 2011 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उनकी अध्यक्षता में गठित कमेटी ने तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी कि किसानों के लिए एमएसपी लागू करें। ये रिपोर्ट पीएमओ में रखी है उसे ही लागू कर दें, नई कमेटी की कोई जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने का वादा चुनाव में किया था, उस पर अमल नहीं हुआ है। पहले तीन क्विंटल गेहूं बेचने पर तीन तोला सोना मिलता था, अब किसान तीन क्विंटल पर तीन तोला सोना मांग रहा है। दो करोड़ नौकरियों का वादा किया और काम प्राइवेट कंपनियों को दिया जा रहा है, देश प्राइवेट मंडी बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने संघर्ष विराम की घोषणा की है, जबकि सिर्फ तीन कानूनों की वापसी भर से मानने वाला नहीं है। आंदोलन चरणवार जारी रहेगा।

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'हम पहले ही कह रहे थे कृषि कानून मर चुके हैं'

योगेंद्र यादव ने कहा कि वह तो बहुत पहले से कह रहे थे कि कृषि कानून मर चुके हैं, अब उन्हें डेथ सर्टिफिकेट चाहिए। पीएम ने उसकी भी घोषणा कर दी है। यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री को अहंकार की बीमारी लगी है, जनता एक साल से दवाई कर रही थी, लेकिन उसका असर नहीं हुआ। पश्चिम बंगाल चुनाव ने छोटा इंजेक्शन दिया और यूपी विधानसभा चुनाव में बड़ा इंजेक्शन लगाने से पहले ही बड़ा असर हो गया है। 

घनवट बोले- विश्‍लेषण के बाद जारी करेंगे रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त कृषि समिति के सदस्य अनिल घनवट ने सोमवार को कहा कि वह कानूनी परिणामों का विश्लेषण करने के बाद पैनल की रिपोर्ट जारी करने के बारे में फैसला करेंगे। उन्‍होंने यह भी दावा किया कि समिति के दो अन्य सदस्यों ने उन्हें इस बारे में निर्णय लेने की स्वतंत्रता दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी से सभी संबंधित पक्षकारों और केंद्र सरकार से बात करके अदालत में रिपोर्ट देने को कहा था। कमेटी ने 19 मार्च को सुको में अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। 19 मार्च के बाद से अब तक रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। उनका कहना था कि सिफारिशें चल रहे किसानों के आंदोलन को हल करने में मदद करेंगी।  शेतकारी संगठन के अध्यक्ष घनवट ने कहा कि समिति ने सोमवार को तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के सरकार के निर्णय की पृष्ठभूमि के संबंध में बैठक की। बैठक में हमने विस्तार से चर्चा की कि रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए या नहीं।


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