सराहनीय कार्य

धानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा केदारनाथ के धाम नियमित रूप से जाना महज आस्था ही नहीं, बल्कि जन-कल्याण के लिए शक्ति संचय का संगम-स्थल है। बाबा केदारनाथ पीएम मोदी के जीवन में भक्त और भगवान के तादात्म्य का प्रतीक हैं। मोदी ने बाबा केदार की पूजा-अर्चना करने के बाद जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी की समाधि का उद्घाटन किया और उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। भगवान शंकर के अवतार शंकराचार्य ने देश में आध्यात्मिक संस्कार और चेतना को जागृत करने के लिए जो अभूतपूर्व कार्य किये थे, उनसे परिचित कराने और उनके सिद्धांतों को जीवन में उतारने का यह अनुपम एवं सराहनीय कार्य है।  आजाद भारत में देश में धर्म व संस्कृति की इस पुनर्स्थापना की कल्पना असंभव ही थी। जिस आध्यात्मिक व सांस्कृतिक चेतना को कुचल दिया गया था, यह उससे मुक्ति है। 2013 में आई केदारनाथ की भीषण प्राकृतिक आपदा को कौन भूल सकता है? इस भीषण आपदा और उससे हुए जान-माल के नुकसान को लेकर वे काफी व्यथित थे। उन्होंने उसी वक्त बाबा केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था।  प्रकृति की इस विनाशलीला और उसके बाद बाबा केदार को उसका दिव्य और भव्य स्वरूप लौटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास सार्थक हुए और  उन्होंने स्वयं, हर महीने केदारनाथ के पुनर्निर्माण की मॉनिटरिंग की। वे पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो अपने पंचवर्षीय कार्यकाल में चार बार बाबा केदारनाथ के दर्शन करने पहुंचे हैं। 2020 में कोरोना के कारण वे नहीं जा पाए तो उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लगातार विकास योजनाओं और पुनर्निर्माण कार्यक्रमों की समीक्षा की।  उनकी हमेशा से यह सोच रही है कि धाम एवं अन्य पवित्र स्थलों का डिजाइन इस प्रकार तैयार करना चाहिए जो समय की कसौटी पर खरा उतरे, पर्यावरण के अनुकूल हो और प्रकृति और उसके आसपास के वातावरण के साथ तालमेल बैठा सके। उत्तराखंड में केदारनाथ, बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब सहित सभी प्रमुख धर्मस्थलों का विकास और इसे पर्यटन का केंद्र बनाना उनकी  प्राथमिकता है। डिजिटल इंडिया के साथ-साथ भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना का पुनर्जागरण इसमें केंद्रीय लक्ष्य है। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के साथ अयोध्या नगर का वैभवशाली अतीत पुनः स्थापित हो रहा है। मथुरा और वृंदावन में भी विकास को नया आयाम दिया जा रहा है।  वैश्विक मंचों पर भारतीय संस्कृति रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से हिंदी में उद्बोधन देते हैं, संस्कृत के महान श्लोकों को उद्धृत करते हैं, दुनिया के राष्ट्राध्यक्षों को श्रीमद्भगवद्गीता और तुलसी का पौधा भेंट करते हैं, तो भारतीय संस्कृति के लिए यह संकल्प और 

मुखर हो उठता है। 


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