गुजरात दंगा केस : बंटवारे में मैंने भी अपनों को खोया

SC में सुनवाई के दौरान भावुक हुए सिब्बल


नई दिल्ली

गुजरात दंगे मामले में एसआईटी की ओर से तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ बुधवार को जाकिया जाफरी की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल ने दलील दी कि इस मामले में एसआईटी ने कई अहम साक्ष्य को नजरअंदाज किया और सही तरह से मामले की छानबीन नहीं की। दंगे में मारे गए कांग्रेसी नेता एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी की ओर से सिब्बल ने दलील देते हुए कहा कि सांप्रदायिक हिंसा ज्वालामुखी के लावा की तरह है, जो धरती पर बुरा असर छोड़ती है। साल 2002 के गुजरात दंगे मामले में क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाकिया की ओर से सिब्बल ने कहा कि मेरी चिंता भविष्य के लिए है। सांप्रदायिक हिंसा ज्वालामुखी की लावा की तरह है जो धरती पर जब आता है, तो उसे भारी नुकसान पहुंचाता है और बुरा असर डालता है। सिब्बल दलील के दौरान भावुक भी हुए और कहा कि बंटवारे के दौरान उन्होंने अपने मैटरनल पैरेंट्स को खोया है। मैं खुद विक्टिम हूं। सिब्बल ने कहा कि वह किसी एक या दूसरे को दोषी नहीं ठहरा रहे हैं, लेकिन विश्व भर को एक संदेश दिया जाना चाहिए कि हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। कपिल सिब्बल ने अपनी दलील में कहा कि एसआईटी ने एक भी आरोपी को नहीं पकड़ा था। तहलका मैग्जीन ने स्टिंग ऑपरेशन किया था और उसमें कई लोगों ने खुल कर कहा था कि उन्होंने सांप्रदायिक दंगे में भाग लिया था। उसी टेप के आधार पर नरोदा पाटिया केस में सजा भी हुई थी। लेकिन जाकिया की शिकायत को एसआईटी ने नजरअंदाज किया। स्टिंग में जिनके नाम आए उनके फोन आदि सीज नहीं हुए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले में होने वाली साजिश का कोई सीधा साक्ष्य नहीं होता है, बल्कि परिस्थितियां बताती हैं और उन परिस्थितियों के आधार पर साक्ष्यों को एकत्र करना होता है। बयान ‌िरकॉर्ड करना होता है और स्पॉट पर जाकर छानबीन करनी होती है। लेकिन एसआईटी ने यह 

सब नहीं किया। छानबीन होनी चाहिए। अगर छानबीन नहीं हुआ तो फिर सुप्रीम कोर्ट की ओर से एसआईटी गठित करने का क्या मतलब रह जाएगा।


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