रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है पुदीना


पुदीना, पेपरमिंट या पिपरमिंट का महत्व आयुर्वेद में बताया गया है। सेहत संबंधी कोई भी परेशानी हो पुदीना से घरेलू नुस्खों के जरिए उन्हें ठीक किया जा सकता है। पुदीना का प्रयोग स्वाद और औषधीय गुणों के लिए कभी भी किया जा सकता है। पिपरमेंट सूखी खांसी में बहुत फायदा करता है क्योंकि इसका मेंथोल कम्पाउंड गले को राहत देता है। इसके साथ ही यह गले की जलन हो या दर्द दोनों को कम करने में मदद करता है। अगर सिर्फ दिन में 2 से 3 बार पिपरमेंट का सेवन किया जाए तो खांसी की समस्या दूर होने लगती है।

पुदीने के ताजे पत्तों को मसलकर मूर्छित व्यक्ति को सुंघाने से मूर्छा दूर होती है।

आंत्र कृमि में पुदीने का रस दें। अजीर्ण होने पर पुदीने का रस पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।

पेटदर्द और अरुचि में 3 ग्राम पुदीने के रस में जीरा, हींग, कालीमिर्च, कुछ नमक डालकर गर्म करके पीने से लाभ होता है।

बिच्छू या बर्रे के दंश स्थान पर पुदीने का अर्क लगाने से यह विष को खींच लेता है और दर्द को भी शांत करता है।

दस ग्राम पुदीना व 20 ग्राम गुड़ को 200 ग्राम पानी में उबालकर पिलाने से बार-बार उछलने वाली पित्ती ठीक हो जाती है।

दिनभर बाहर रहने वाले लोगों को पैर के तलवों जलन की शिकायत रहती है, ऐसे में उन्हें फ्रिज में रखे हुए पुदीने को पीसकर तलवों पर लगाना चाहिए।

 सूखा या गीला पुदीना छाछ, दही, कच्चे आम के पने के साथ मिलाकर पीने पर पेट में होने वाली जलन दूर होगी और ठंडक मिलती है। 

अगर आपको अक्सर टॉंसिल्स की शिकायत रहती है और इसमें होने वाली सूजन से भी आप परेशान हैं तो पुदीने के रस में सादा पानी मिलाकर इस पानी से गरारे करना आपके लिए फायदेमंद होगा।


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