सियासी दलों को चुकानी होगी ज्यादा कीमत


लखनऊ 

चुनाव आयोग इस बार सोशल मीडिया पर पैनी नजर बनाए हुए है। परदे के पीछे से चुनाव के समय हैशटैग ट्रेंड करा कर मतदान प्रभावित करने वाले राजनीतिक दलों के आईटी सेल भी निशाने पर हैं। दरअसल आईटी सेल के हैंडल सामान्य नागरिकों के नाम वाले होते हैं। जब कहीं मतदान हो रहा होता है तो ये सक्रिय हो जाते हैं। चुनाव आयोग की आचार संहिता को लेकर हुई हालिया वेब कॉन्फ्रेंसिंग में कई राज्यों से राजनीतिक दलों के आईटी सेल को घेरे में लेने की सिफारिश की गई। पंजाब के एक जिला निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि इनको दायरे में लाना जरूरी है। एक प्रतिभागी ने कहा कि ये आईटी सेल वाले सीधे तौर पर प्रत्याशी को जिताने के लिए प्रचार करते हैं। इनको चुनाव खर्च में शामिल किया जाना चाहिए। इस पर आयोग ने भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए इस दिशा में कदम उठाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद अब आयोग प्रत्येक जिले में गठित कमेटियों में सोशल मीडिया टीम पर जोर दे रहा है। यही टीम आसानी से आईटी सेल को चिह्नित कर सकती है। जिसके बाद जरूरी कदम उठाते हुए जरूरी कार्रवाई की जाएगी। चुनाव में पार्टी या प्रत्याशी के प्रचार के लिए खुलकर पैसे खर्च किए जाते हैं। एक आईटी सेल के कर्मचारी ने बताया कि एक हैशटैग पर लगातार ट्वीट किए जाते हैं। प्रत्येक ट्वीट का तीन से चार रुपए दाम तय रहता है। इसके अलावा यदि हैशटैग देश के टॉप 10 में शामिल हो गया तो उसकी कीमत अलग से तय होती है। कई पीआर एजेंसियां भी अब आईटी सेल के कार्य में उतर चुकी हैं। कई टीमों में ग्राफिक डिजाइनर से लेकर अलग-अलग एक्सपर्ट भी रखे जाते हैं।


Labels:

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget