मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो करें उनके वाहन का पूजन....


एक पौराणिक मान्यता है कि लक्ष्मीजी समुद्र से प्रकट हुई और भगवान विष्णु की सेवा में लग गईं। लक्ष्मीजी का स्वभाव चंचल माना गया।इसलिए उनकी आराधना व उपयोग के मामले में भी सावधानी की आवश्यकता होती है। लक्ष्मी का वाहन उल्लू स्वभाव से रात में देखने में सक्षम होता है। उल्लू अज्ञान का प्रतीक है। वह अंधकार में ही जाग्रत होता है। लक्ष्मी उल्लू पर बैठी है, इसका अर्थ यह है कि वे अज्ञान की सवारी करती हैं और सही ज्ञान को जाग्रत करने में सहयोगी होती हैं।यदि लक्ष्मी का उपयोग अज्ञान के साथ होगा तो वह भोग और नाश तक ही सीमित रह जाएगा। यदि ज्ञान के साथ होगा तो दान व परोपकार की दिशा में लगेगा। संकेत यही है कि रीति से कमाया हुआ धन नीति से खर्च करें। उल्लू की सवारी का धार्मिक विचार: धार्मिक शास्त्रों में लक्ष्मी जी के वाहन के चार भेद बताएं गए हैं अर्थात चतुर्भुजी लक्ष्मी जी के चार प्रकार बताए गए हैं। पहला गरुड़-वाहिनी दूसरा गज-वाहिनी तीसरा सिंह-वाहिनी और चौथा उलूक-वाहिनी। लक्ष्मी जब गरुड़ पर सवार होती हैं, तब वो भगवान विष्णु के साथ विराजमान होती हैं। तब वह आकाश भ्रमण करती हैंं तथा गरुड़ वाहिनी कहलाती हैं। लक्ष्मी जी जब श्वेत हाथी पर सवार होती है, तब वह धर्म लक्ष्मी कहलाती है। हाथी कर्मठ और बुद्धिमान प्राणी है। हाथी के समूह में हथनीयों को प्राथमिकता तथा सम्मान दिया जाता है। हाथी अपने परिवार के लिए कर्म करके भोजन अर्जित करता है। हाथी समूह में रहकर एकता बनाए रखता है तथा पारिवारिक धर्म का निर्वाह करता है।

लक्ष्मी जी जब सिंह पर सवार होती हैं तब वह कर्म लक्ष्मी कहलाती हैं। ये लक्ष्मी का अघोर स्वरुप हैं जब व्यक्ति साम दाम दंड भेद और नीति से पैसे कमाता है तब सिंह पर सवार लक्ष्मी का उद्गमन होता है। चौथा जब लक्ष्मी जी घुग्घू अर्थात उल्लू की सवारी करती हैं। महालक्ष्मी मूलतः रात्रि की देवी हैं तथा रात के समय उल्लू सदा क्रियाशील रहता है। उल्लू पेट भरने हेतु दिन के समय में अंधा बनकर अर्थात कोलुह का बैल बनकर कार्य करता है तथा संपूर्ण दिमाग के साथ रात में जागकर और आंखें खोलकर कार्य करता है। उल्लू पर सवार लक्ष्मी को उल्लूक वाहिनी कहा गया है।

चमत्कारी उल्लू: तंत्र शास्त्र के अनुसार लक्ष्मी वाहन उल्लू रहस्यमयी शक्तियों का स्वामी है। प्राचीन ग्रीक में उल्लू को सौभाग्य और धन का सूचक माना जाता था। यूरोप में उल्लू को काले जादू का प्रतीक माना जाता है। भारत में उल्लूक तंत्र सर्वाधिक प्रचलित है। चीनी वास्तु शास्त्र फेंगशुई में उल्लू को सौभाग्य, स्वा स्य्उल  और सुरक्षा का भी पर्याय माना जाता है। जापानी लोग उल्लू को कठिनाइयों से बचाव करने वाला मानते हैं। चूंकि उल्लू को निशाचर यानी रात का प्राणी माना जाता है और यह अंधेरी रात में भी न सिर्फ देख सकता है बल्कि अपने शिकार पर दूर दृष्टि बनाए रख सकता है।

पौराणिक कथा में लक्ष्मी का वाहन वैसे तो भारतीय परंपरा में उल्लू माना जाता है, लेकिन भारतीय ग्रंथों में ही इनके कुछ अन्य वाहनों का उल्लेख है। महालक्ष्मी सोत्र में गरूड़ को इनका वाहन बताया गया है, जबकि अथर्ववेद के वैवर्त में हाथी को लक्ष्मी का वाहन कहा गया है।

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