सहायक आयुक्त ने पलटा मनपा कमिश्नर का फैसला

पिंपरी

देश में नौकरशाहों के लिए एक संवैधानिक दायरा बनाया गया है। अगर कोई अपने संवैधानिक दायरे को लांघता है तो अपराधी की श्रेणी में आता है। किसी भी सरकारी, गैर-सरकारी संस्थानों में मुख्य बॉस का निर्णय सर्वोपरि माना गया है। नीचे की टीम को अनुसरण करना पड़ता है। अगर अपने बॉस के निर्णय को क्रॉस करके कोई अपना निर्णय थोंपता है तो सीधे तौर पर अपने बॉस की बुद्धिमत्ता, निर्णय को चुनौती देता है। पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका में ऐसा ही कुछ हुआ है। छठ पूजा के महापर्व पर महानगरपालिका कमिश्नर राजेश पाटिल ने शहर के सभी घाटों पर सरल, शांतिपूर्ण ढंग से छठ पूजा मनाने की लिखित अनुमति देते हैं। दूसरे दिन उनके सहायक आयुक्त अण्णा बोदडे अपने ही कमिश्नर के निर्णय को पलट देते हैं और अपनी मनमर्जी से एक स्वतंत्र पत्र जारी करते हुए छठ पूजा पर रोक लगा देते हैं। छठव्रतियों में आश्चर्यजनक भ्रम की स्थिति पैदा होती है कि आखिर महानगरपालिका का कमिश्नर कौन? अण्णा बोदडे या फिर राजेश पाटिल? 


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