अब पांच साल का होगा CBI-ED चीफ का कार्यकाल

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला


नई दिल्‍ली

केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। वह दो अध्‍यादेश लाई है। इनके तहत सीबीआई और ईडी के प्रमुखों का कार्यकाल पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है। अभी केंद्र सरकार की इन एजेंसियों में दोनों चीफ के कार्यकाल की अवधि दो साल होती है।  

सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस 2021 के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुख का कार्यकाल शुरुआती एप्‍वाइंटमेंट से एक बार में एक साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। ऐसा संबंधित सेलेक्‍शन कमिटी के अप्रूवल पर किया जाएगा। दो साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद इसकी अनुशंसा की जानी है।

सीबीआई डायरेक्‍टर के कार्यकाल में बदलाव के लिए दिल्‍ली स्‍पेशल पुलिस स्‍टैबलिशमेंट ऐक्‍ट, 1946 में संशोधन किया गया है। ठीक इसी तरह ईडी चीफ का कार्यकाल पांच साल तक बढ़ाने के लिए सेंट्रल विजिलेंस कमीशन ऐक्‍ट, 2003 में संशोधन किया गया है।

क्‍यों अहम है टाइमिंग?

सरकार ने यह कदम संसद के शीतकालीन सत्र से ऐन पहले उठाया है। केंद्र सरकार इन अध्‍यादेश को संसद के पटल पर रख सकती है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अगुआई अभी आईआरएस संजय मिश्रा कर रहे हैं। वहीं, सीबीआई की कमान आईपीएस सुबोध जायसवाल के हाथों में है।

कैसे होता है CBI प्रमुख का चयन?

सीबीआई चीफ का चयन सेलेक्शन कमेटी की ओर से तय किया जाता है। इसमें प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और नेता विपक्ष शामिल होते हैं। सीबीआई चीफ चुने जाने की प्रक्रिया की शुरुआत गृह मंत्रालय से होती है। इसी मंत्रालय की ओर से IPS अधिकारियों की एक लिस्ट बनाई जाती है। इसमें उनके अनुभव और वरिष्ठता का ध्यान रखा जाता है। ऐसे अधिकारियों की लिस्ट तैयार होने के बाद उसे कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को भेज दिया जाता है।

दोबारा होती है स्‍क्रीनिंग

वहां, दोबारा से इस लिस्ट की जांच होती है और जिन अधिकारियों का इसमें नाम होता है उनके पिछले ट्रैक रिकॉर्ड को खंगाला जाता है। इसी आधार पर एक फाइनल लिस्ट तैयार की जाती है। यह पूरा काम सर्च कमेटी की ओर से किया जाता है। सर्च कमेटी की इन नामों पर चर्चा के बाद अपनी सिफारिश सरकार को भेजती है। इसके बाद CBI डायरेक्टर का चयन सेलेक्शन कमेटी की ओर से तय किया जाता है। इसमें प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और नेता विपक्ष शामिल होते हैं। लोकपाल ऐक्ट आने के बाद यह पूरी प्रक्रिया 2014 से लागू है। इससे पहले सीबीआई डायरेक्टर चुनने के लिए केंद्र सरकार की ओर से समिति बनाई जाती थी। इसका अध्यक्ष केंद्रीय सतर्कता आयुक्त होता था।


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